UP Politics: संजय निषाद के मंच पर रोने पर अखिलेश यादव का तंज, बोले- ‘ये पश्चाताप के आँसू हैं या प्रायश्चित?’

संजय निषाद के रोने पर अखिलेश यादव का तंज

UP Politics: गोरखपुर में मंत्री संजय निषाद के रोने पर अखिलेश यादव ने कसा तंज। बोले- ये पश्चाताप के आँसू हैं या प्रायश्चित?

Prajatantra TV Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर की एक घटना ने नई बहस छेड़ दी है। योगी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद के मंच पर भावुक होकर रोने के बाद अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि यह “पश्चाताप के आँसू हैं या प्रायश्चित के?” उनका यह बयान अब सियासी हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

‘पीड़ा बढ़ रही है… पीड़ित बढ़ रहे हैं’

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा, “पीड़ा बढ़ रही है… पीड़ित बढ़ रहे हैं… इसीलिए पीडीए (PDA) बढ़ रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि समाज में असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब सवाल पूछ रही है और जो दृश्य सामने आया है, वह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि सियासी संकेत भी देता है।

‘हम थे जिनके सहारे…’ वाले बयान से तंज

सपा प्रमुख ने अपने बयान में एक गीत की पंक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि, “जनता कह रही है कि इस वीडियो के बैकग्राउंड में जो गाना सुनाई दे रहा है, वो भ्रम है या सच—‘हम थे जिनके सहारे, वो हुए न हमारे…’।”
इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भाजपा और सहयोगी दलों के रिश्तों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए।

क्या हुआ था गोरखपुर में?

दरअसल, रविवार को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में एक जनसभा के दौरान मंत्री संजय निषाद भाषण देते-देते भावुक हो गए और मंच पर ही रो पड़े। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि पिछली सरकारों ने उनके समाज को “ठगने और लूटने का काम किया” और वर्तमान सरकार ने उनकी पीड़ा को समझा है।

उन्होंने अपने समाज की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा था कि बहन-बेटियों की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय हुआ है, जिसे लेकर वे भावुक हो गए।

बढ़ी सियासी गर्मी

संजय निषाद के भावुक भाषण और उसके बाद अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस तरह की घटनाएं और बयानबाजी राजनीतिक माहौल को और गर्म कर रही हैं।

फिलहाल, अखिलेश यादव के इस बयान पर सत्ता पक्ष या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

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